Tuesday, September 9, 2014

एक धीमा आलसी दिन

आज की सुबह फिर वही आलसी सुबह रही, सामन्य रूप से मैं फिर प्रातः पांच बजे अलार्म की पहली घंटी के साथ उठा और प्रेरणा के आभाव में वापस सो गया, ये कार्यक्रम पिछले काफी दिनों से चला आ रहा है जिसकी शुरुआत पता नहीं शायद कब हुई और अंत पता नहीं कब होगा जो भी है न तो मैं इस  दिनचर्या के बन चुके अंग से परेशान हूँ और न तो मैं इसे बदलने की ज़रुरत समझता हूँ, जब समझूंगा तो बदलाव स्वतः ही आ जाएगा ।

चलिए  आगे बढ़ते हैं, तो फिर सुबह हुई ठीक सात बज के तीस मिनट पे जब दूध वाले लड़के ने घंटी बजाई, अब उसके पास सुबह उठने की प्रेरणा तो है ही, प्रेरणा से मतलब पैसा भाई, हाँ फिर उठ कर ये देख कर की ऑफिस जाने का टाइम  हो ही चूका है  आप के पास कुछ ही विकल्प बचते हैं या तो आप धुप सेक लें या दौड़ लें तो आज विटमिन डी लेना ही उचित समझा गया।

ऑफिस पहुँच कर आज मेरा प्लान था की windchill सर्वर इंस्टॉल किया जाय और एक इशू जो की काफी दिनों से पेंडिंग था उसे स्टडी किया जाए, तो दोपहर तक इशू की स्टडी शुरू हुई, ऐसा लगता है की प्रॉब्लम javascript में xml जेनरेट करते समय स्ट्रिंग एन्कोडिंग के कारणवश है अब ये तो कल ही पता चलेगा, वैसे सर्वर देर से इंस्टॉल होने का कारण तो स्वयं मैं ही रहा कभी बताऊंगा विस्तार से।

इक अन्य समस्या जिसे हल करना बाकी है वो है xpath qyery के फ़ैल होने पर कारण लॉग करना, जो मुझे लगता है की हमारी सीमाओं को ध्यान में रखेंगे तो आसान रूप से संभव हो सकता है ये भी विस्तार से कल ही बताया जा सकेगा।

संध्या का समय व्यायामशाला का रहा, आज चेस्ट था जो की ठीक ठाक रहा मुझे लगता है की और ज़ोर लगाया जा सकता है।

अंत करने से पहले उल्लेख करना आवश्यक है की ये मेरी पहली एंट्री है डायरी में, धन्यवाद है http://helplogger.blogspot.in/ का और गूगल का ।

शुभ रात्रि

No comments :

Post a Comment